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क्या अपने मकसद में कामयाब होगा अमेरिका? ईरान में पेट्रोल पंपों पर लगीं लंबी लाइनें

Written By: Vineet Kumar Singh
Published : Aug 25, 2026 11:15 pm IST,  Updated : Aug 25, 2026 11:15 pm IST
ईरान पर अमेरिकी नाकाबंदी और प्रतिबंधों का दबाव बढ़ता जा रहा है। तेहरान में पिछले कुछ हफ्तों से गैस स्टेशनों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। कई लोगों को वाहन में ईंधन भराने के लिए दो घंटे या उससे ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है। मंगलवार को अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था से पूरी तरह अलग करने की धमकी दी। ईरानी अधिकारियों ने भी बढ़ते दबाव के बीच भारी ईंधन सब्सिडी कम करने की संभावना जताई है।
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ईरान पर अमेरिकी नाकाबंदी और प्रतिबंधों का दबाव बढ़ता जा रहा है। तेहरान में पिछले कुछ हफ्तों से गैस स्टेशनों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। कई लोगों को वाहन में ईंधन भराने के लिए दो घंटे या उससे ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है। मंगलवार को अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था से पूरी तरह अलग करने की धमकी दी। ईरानी अधिकारियों ने भी बढ़ते दबाव के बीच भारी ईंधन सब्सिडी कम करने की संभावना जताई है।
तेहरान में रहने वाले 34 वर्षीय नाई हाशेम अबादी ने कहा, 'शायद हमें ईंधन की कमी का सामना करना पड़े। जब भी मेरी गाड़ी की टंकी करीब आधी रह जाती है, मैं तुरंत पेट्रोल पंप पहुंचने की कोशिश करता हूं।' अमेरिका की नई कार्रवाई का मकसद ईरान से रियायतें हासिल करना है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल की ओर से शुरू किए गए युद्ध को करीब छह महीने हो चुके हैं। इस युद्ध ने ईरान की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं है कि ईरान के नेता अमेरिकी दबाव के आगे झुक रहे हैं या जनवरी में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों जैसी स्थिति दोबारा बन रही है।
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तेहरान में रहने वाले 34 वर्षीय नाई हाशेम अबादी ने कहा, 'शायद हमें ईंधन की कमी का सामना करना पड़े। जब भी मेरी गाड़ी की टंकी करीब आधी रह जाती है, मैं तुरंत पेट्रोल पंप पहुंचने की कोशिश करता हूं।' अमेरिका की नई कार्रवाई का मकसद ईरान से रियायतें हासिल करना है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल की ओर से शुरू किए गए युद्ध को करीब छह महीने हो चुके हैं। इस युद्ध ने ईरान की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं है कि ईरान के नेता अमेरिकी दबाव के आगे झुक रहे हैं या जनवरी में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों जैसी स्थिति दोबारा बन रही है।
ईंधन की कतारें अमेरिकी वित्त मंत्री की नई घोषणा से पहले ही लंबी होने लगी थीं। अमेरिकी नाकाबंदी और पहले से लागू प्रतिबंधों के कारण ईंधन की कमी बढ़ी है। वहीं दोहरे अंक की महंगाई और ईरानी मुद्रा रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने से आम लोगों के लिए रोजमर्रा का सामान खरीदना भी मुश्किल हो रहा है। 51 वर्षीय टैक्सी चालक महमूद चावोशी ने कहा, 'मैं अपनी गाड़ी में जितना संभव हो सके उतना ईंधन भरवा रहा हूं, क्योंकि जल्द ही इसकी कीमतें बढ़ सकती हैं। पिछले एक हफ्ते में दूध से लेकर पास्ता तक, हर चीज महंगी हो गई है।'
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ईंधन की कतारें अमेरिकी वित्त मंत्री की नई घोषणा से पहले ही लंबी होने लगी थीं। अमेरिकी नाकाबंदी और पहले से लागू प्रतिबंधों के कारण ईंधन की कमी बढ़ी है। वहीं दोहरे अंक की महंगाई और ईरानी मुद्रा रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने से आम लोगों के लिए रोजमर्रा का सामान खरीदना भी मुश्किल हो रहा है। 51 वर्षीय टैक्सी चालक महमूद चावोशी ने कहा, 'मैं अपनी गाड़ी में जितना संभव हो सके उतना ईंधन भरवा रहा हूं, क्योंकि जल्द ही इसकी कीमतें बढ़ सकती हैं। पिछले एक हफ्ते में दूध से लेकर पास्ता तक, हर चीज महंगी हो गई है।'
बैंकों के बाहर फिलहाल ऐसी लंबी कतारें नहीं हैं और किराना दुकानों व फार्मेसी में सामान भी उपलब्ध है, लेकिन लोगों की खरीदने की क्षमता कम हो गई है। युद्ध के दौरान महंगाई तेजी से बढ़ी है और बेसेंट की घोषणा से पहले रियाल रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। तेहरान के एक दुकानदार मोर्तेजा दरयानी ने कहा, 'हमारे कुछ पुराने ग्राहक अब सामान लेकर बाद में पैसे देते हैं, क्योंकि उनकी जेब पहले जितनी भरी नहीं है।' ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका पर सैन्य रूप से ईरान को हराने में नाकाम रहने के बाद आर्थिक दबाव बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'क्या हमें समस्याओं के आगे झुककर आत्मसमर्पण कर देना चाहिए? बिल्कुल नहीं।'
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बैंकों के बाहर फिलहाल ऐसी लंबी कतारें नहीं हैं और किराना दुकानों व फार्मेसी में सामान भी उपलब्ध है, लेकिन लोगों की खरीदने की क्षमता कम हो गई है। युद्ध के दौरान महंगाई तेजी से बढ़ी है और बेसेंट की घोषणा से पहले रियाल रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। तेहरान के एक दुकानदार मोर्तेजा दरयानी ने कहा, 'हमारे कुछ पुराने ग्राहक अब सामान लेकर बाद में पैसे देते हैं, क्योंकि उनकी जेब पहले जितनी भरी नहीं है।' ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका पर सैन्य रूप से ईरान को हराने में नाकाम रहने के बाद आर्थिक दबाव बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'क्या हमें समस्याओं के आगे झुककर आत्मसमर्पण कर देना चाहिए? बिल्कुल नहीं।'
फिलहाल आर्थिक परेशानी के बावजूद ईरान में नए विरोध प्रदर्शनों के संकेत नहीं हैं। साल की शुरुआत में अधिकारियों ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों को हिंसक तरीके से दबाया था, जिसमें हजारों लोगों के मारे जाने की बात कही गई। ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और सशस्त्र समूहों के समर्थन के कारण दशकों से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। चीन को तेल की बिक्री लंबे समय से उसकी अर्थव्यवस्था के लिए सहारा बनी हुई है और यह अभी स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका इसे पूरी तरह रोक पाएगा।
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फिलहाल आर्थिक परेशानी के बावजूद ईरान में नए विरोध प्रदर्शनों के संकेत नहीं हैं। साल की शुरुआत में अधिकारियों ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों को हिंसक तरीके से दबाया था, जिसमें हजारों लोगों के मारे जाने की बात कही गई। ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और सशस्त्र समूहों के समर्थन के कारण दशकों से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। चीन को तेल की बिक्री लंबे समय से उसकी अर्थव्यवस्था के लिए सहारा बनी हुई है और यह अभी स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका इसे पूरी तरह रोक पाएगा।
ईरान की अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाले Bourse & Bazaar Foundation के प्रमुख एसफंदयार बतमंगेलिज ने कहा कि बेसेंट जिन क्षेत्रों को निशाना बनाने की धमकी दे रहे हैं, वे ईरानी सरकार की नहीं बल्कि ईरानी जनता की जीवनरेखा हैं। उनके अनुसार, डिजिटल संपत्तियां और सोना ईरानी लोगों को अपनी बचत सुरक्षित रखने में मदद करते हैं, तकनीक उन्हें दुनिया से जोड़े रखती है, विमानन से लोग यात्रा कर पाते हैं और समुद्री परिवहन के जरिए ईरान में भोजन और दवाइयां पहुंचती हैं।
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ईरान की अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाले Bourse & Bazaar Foundation के प्रमुख एसफंदयार बतमंगेलिज ने कहा कि बेसेंट जिन क्षेत्रों को निशाना बनाने की धमकी दे रहे हैं, वे ईरानी सरकार की नहीं बल्कि ईरानी जनता की जीवनरेखा हैं। उनके अनुसार, डिजिटल संपत्तियां और सोना ईरानी लोगों को अपनी बचत सुरक्षित रखने में मदद करते हैं, तकनीक उन्हें दुनिया से जोड़े रखती है, विमानन से लोग यात्रा कर पाते हैं और समुद्री परिवहन के जरिए ईरान में भोजन और दवाइयां पहुंचती हैं।
अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेंट ने सोमवार को ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर द्वितीयक अमेरिकी प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी थी। उन्होंने संकेत दिया कि वॉशिंगटन के दबाव के कारण ही यूएई ने ईरान के साथ संबंधों में यह कदम उठाया। ईरान भी जवाब में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बड़े पैमाने पर बंद करके दबाव बना रहा है। युद्ध से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल और गैस इसी अहम समुद्री मार्ग से गुजरता था। ईरान को उम्मीद है कि इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था और अमेरिकी ईंधन कीमतों पर असर राष्ट्रपति ट्रंप को पीछे हटने के लिए मजबूर करेगा।
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अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेंट ने सोमवार को ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर द्वितीयक अमेरिकी प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी थी। उन्होंने संकेत दिया कि वॉशिंगटन के दबाव के कारण ही यूएई ने ईरान के साथ संबंधों में यह कदम उठाया। ईरान भी जवाब में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बड़े पैमाने पर बंद करके दबाव बना रहा है। युद्ध से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल और गैस इसी अहम समुद्री मार्ग से गुजरता था। ईरान को उम्मीद है कि इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था और अमेरिकी ईंधन कीमतों पर असर राष्ट्रपति ट्रंप को पीछे हटने के लिए मजबूर करेगा।
यानी एक तरफ अमेरिका प्रतिबंधों और आर्थिक नाकाबंदी के जरिए ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है, वहीं ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ऊर्जा आपूर्ति के जरिए अमेरिका तथा वैश्विक बाजार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल तेहरान में आम लोग महंगाई और ईंधन की परेशानी झेल रहे हैं, लेकिन ईरानी नेतृत्व की ओर से आत्मसमर्पण या बड़े नए राजनीतिक संकट के स्पष्ट संकेत अभी सामने नहीं आए हैं।
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यानी एक तरफ अमेरिका प्रतिबंधों और आर्थिक नाकाबंदी के जरिए ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है, वहीं ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ऊर्जा आपूर्ति के जरिए अमेरिका तथा वैश्विक बाजार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल तेहरान में आम लोग महंगाई और ईंधन की परेशानी झेल रहे हैं, लेकिन ईरानी नेतृत्व की ओर से आत्मसमर्पण या बड़े नए राजनीतिक संकट के स्पष्ट संकेत अभी सामने नहीं आए हैं।
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